24.3.09

शिक्षा कारोबार में भी सेंध लगा रहे हैं विदेशी संस्थान

शिक्षा कारोबार की दिग्गज विदेशी कंपनियां भारत को बड़े बाजार के तौर पर देख रही हैं। वैसे तो भारत सरकार शिक्षा के व्यवसायीकरण को लेकर स्पष्ट नियम-कायदे अब तक नहीं बना पाई है, लेकिन शिक्षा क्षेत्र की विदेशी कंपनियों ने भारतीय बाजार में सेंध लगाने के रास्ते ढूंढ लिए हैं। विदेशी कंपनियां प्रोफेशनल एजुकेशन से लेकर स्कूल एजुकेशन तक के कारोबार में भारतीय कंपनियों व संस्थाओं से साझेदारी अथवा भारतीय इकाई बनाकर यहां बड़े बाजार में कदम रख रही हैं। सिंगापुर के प्रमुख प्राइवेट एजुकेशन ग्रुप रैफेल एजुकेशन कॉर्प ने इस साल भारतीय बाजार में एंट्री कर ली है। इसके लिए रैफेल ने शिक्षा क्षेत्र की भारतीय कंपनी एड्यूकॉम के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत दिल्ली, बंगलुरू और मुंबई में रैफेल मिलेनियम इंटरनेशनल नामक डिजाइन इंस्टीट्यूट खोला जा रहा है। एड्यूकॉम और रैफेल एजुकेशन कॉर्प ने मिलकर भारत में कारोबार करने के लिए एड्यूकॉम-रैफेल हायर एजुकेशन लिमिटेड नामक कंपनी बनाई है। इस कंपनी के निदेशक रोहित कुमार का कहना है कि भारत में विश्वस्तरीय शिक्षा देने वाले संस्थानों की कमी है जिसे पूरा करने के लिए प्रमुख शहरों में रैफेल मिलेनियम इंस्टीट्यूट शुरू किए जा रहे हैं। बैचलर और मास्टर प्रोग्राम चलाने वाले इस संस्थान में डिजाइन से जुड़े कोर्स की सालाना फीस तकरीबन पांच लाख रुपये है, जबकि न तो संस्थान और न ही इसके कोर्स को किसी विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त है। बगैर सरकारी मंजूरी के भारत में विदेशी संस्थाओं व कंपनियों के कोर्स चलाने वाले संस्थानों की तादाद दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन उच्च व तकनीकी शिक्षा की नियामक संस्थाएं यूजीसी और एआईसीटीई इन पर किसी भी तरह का नियंत्रण कर पाने में नाकाम साबित हुई हैं। स्कूली शिक्षा के कारोबार में भी विदेशी कंपनियां और संस्थाएं इसी तरह की साझेदारी के जरिए उतर रही हैं। दुनिया भर में करीब 100 इंटरनेशनल स्कूल चला रहे दुबई के ग्लोबल एजुकेशन मैनेजमेंट सिस्टम ने अगले तीन साल के अंदर भारत में 50 स्कूल खोलने की घोषणा की है। आस्ट्रेलिया के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया के 7 देशों में 15 इंटरनेशनल स्कूल चला रहे ग्लोबल इंडियन फाउंडेशन ने भी अगले 10 वर्षे के दौरान भारत में 80 स्कूल खोलने का ऐलान किया है।

22.3.09

ब्लैकबेरी में बीएसएनएल के आने से तेज होगा प्राइस वार

सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) ब्लैकबेरी सेवाएं शुरू करने जा रही है। बीएसएनएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कुलदीप गोयल का कहना है कि कंपनी अप्रैल तक ब्लैकबेरी सेवाएं लांच कर देगी। बीएसएनएल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कंपनी को ब्लैकबेरी के लिए जरूरी मंजूरी मिल चुकी है और वह 20 मार्च को चंडीगढ़ में सेवाएं लांच कर देगी। इसके बाद महीने के आखिर तक एमटीएनएल की ओर से भी दिल्ली और मुंबई में ब्लैकबेरी लांच किए जाने की उम्मीद है। उधर, इस नए क्षेत्र में बीएसएनएल की एंट्री और वित्त वर्ष के आखिर में मुनाफा बचाए रखने के लिए निजी टेलीकॉम कंपनियां भी टैरिफ घटाने की तैयारी कर रही हैं। बीएसएनएल की ओर से दी जाने वाली ब्लैकबेरी सेवाओं में 3जी सुविधा के इस्तेमाल की सहूलियत भी होगी। निजी कंपनियों को टक्कर देने के लिए बीएसएनएल ब्लैकबेरी का किफायती टैरिफ पेश करेगी। बीएसएलएल ब्लैकबेरी का न्यूनतम टैरिफ 300 से 400 रुपये के बीच हो सकता है। इसके अलावा सेवाओं के इस्तेमाल के वक्त डाउनलोडिंग आदि के लिए वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्क से भी ग्राहक को बचाकर प्लान को आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है। अभी तक ब्लैकबेरी में सबसे कम टैरिफ एयरटेल का है। एयरटेल 249 रुपये मासिक रेंटल वाले प्लान में 15 पैसे प्रति केबी की दर से डाउनलोडिंग जार्च लेती है। इसी तरह वोडाफोन का न्यूनतम प्लान 299 रुपये का है लेकिन वह इंटरनेट इस्तेमाल के बजाए सिर्फ ई-मेल पढ़ने की सुविधा देता है। अनलिमिटेड इस्तेमाल वाले ब्लैकबेरी प्लान में आईडिया 1099 और टाटा टेली 1350 रुपये मासिक रेंटल वाले टैरिफ हैं। अगर बीएसएनएल बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के 400 रुपये से कम मासिक रेंटल वाले प्लान बगैर डाउनलोड चार्ज के साथ लांच करता है तो टेलीकॉम सेवाओं के इस क्षेत्र में प्राइसवार तेज हो जाएगी। 3जी सेवाओं की सहूलियत के साथ बीएसएनएल का ब्लैकबेरी बाकी टेलीकॉम कंपनियों पर भारी पड़ सकता है। एयरटेल और वोडाफोन को अभी 3जी स्पैक्ट्रम आवंटित होना बाकी है जबकि सरकार बीएसएनएल को पहले ही 3जी रेडियो फ्रीक्वेंसी दे चुकी है। विवादों में रही हैं ब्लैकबेरी सेवाएंब्लैकबेरी सेवाओं में डेटा ट्रांसफर के सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ न आने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद सरकारी टेलीकॉम कंपनी की ओर से ब्लैकबेरी सेवाएं लांच किए जाने के मुद्दे पर गोयल का कहना है कि 3जी सेवाओं की निगरानी संभव है और फिलहाल इस पर किसी तरह की रोक नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने बीएसएनएल और एमटीएनएल को तब तक 3जी सेवाएं उपलब्ध न कराने को कहा था जब तक कि खुफिया एजेंसियों को इन कॉल्स की निगरानी की सुविधा नहीं मिल जाती।

अग्निपरीक्षा है डीएलएफ की दिल्ली लांचिंग

देश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ लिमिटेड लंबे अरसे के बाद दिल्ली में हाउसिंग प्रोजेक्ट लाने जा रही है। चालीस से लेकर सत्तर के दशक तक दिल्ली में 20 से ज्यादा कॉलोनियां विकसित करने वाली डीएलएफ ने आर्थिक सुस्ती के दौर में एक बार फिर दिल्ली का रुख किया है। ग्रेटर कैलाश में क्वीन कोर्ट के नाम से आवासीय प्रोजेक्ट लांच करने के बाद डीएलएफ अब कीर्ति नगर में शिवाजी मार्ग पर हाउसिंग प्रोजेक्ट लाने जा रही है। इन हाउसिंग प्रोजेक्ट के साथ डीएलएफ करीब 30 साल बाद स्थानीय हाउसिंग मार्केट में कदम रख रही है। डीएलएफ शिवाजी मार्ग प्रोजेक्ट की लांचिंग में ज्यादा जोखिम उठाने के मूड में नहीं दिखती। यही वजह है कि कंपनी ने पहले प्रोजेक्ट की सॉफ्ट लांचिंग का फैसला किया है। बुकिंग की घोषणा अगले 15 दिनों के अंदर किसी भी दिन हो सकती है जिसके लिए ब्रोकर्स से 10 लाख रुपये का चेक तैयार रखने को कहा जा रहा है। कारोबारी चुनौतियों का मुकाबला करने में डीएलएफ को काफी लंबा अनुभव है। वर्ष 1957 में दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी की स्थापना के बाद जब दिल्ली में प्राइवेट डेवलपर्स की गतिविधियों पर पांबदी लगाई जाने लगी तब भी डीएलएफ ने गुड़गांव में नई जमीन तलाशने में देर नहीं की थी। अब एक बार फिर डीएलएफ ने दिल्ली की जमीन से दम भरने का फैसला किया है। शिवाजी मार्ग प्रोजेक्ट की बुकिंग के बारे में एस-टेक रियलटर्स के मालिक श्याम गुप्ता का कहना है कि अभी तक का यही रिकॉर्ड है कि डीएलएफ के ज्यादातर प्रोजेक्ट की बुकिंग एक ही दिन में पूरी हो जाती है। कंपनी अपने ब्रोकर नेटवर्क को बुकिंग के वास्ते चेन तैयार रखने के लिए कहती है और बुकिंग शुरू होने के दिन सौदा करने वाले लोगों को डिस्काउंट का लाभ देकर उसी दिन बुकिंग पूरी हो जाती है। हालांकि, अब प्रॉपर्टी बाजार के हालात बदल चुके हैं। ऐसे में यह प्रोजेक्ट डीएलएफ के लिए बड़ा इम्तिहान साबित होगा। यही वजह है कि अभी तक कंपनी ने बुकिंग की तारीख और भाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। गुप्ता के मुताबिक, हाल ही में ब्रोकर के साथ हुई बैठक के बाद डीएलएफ ने इस प्रोजेक्ट में मकान की कीमत 7,500 रुपये प्रति वर्ग फुट से घटाकर 6,000 से 7,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच रखने के संकेत दिए हैं। डीएलएफ इस प्रोजेक्ट को सीधे लांच न कर ब्रोकर्स के साथ इस अनौपचारिक मोलभाव के जरिए बाजार के मिजाज को जानकर सॉफ्ट लांचिंग कर रही है।

10.3.09

प्रॉपर्टी डेवलपर्स पर अब खरीदार पड़ रहे हैं भारी

अजीत सिंह समय अनुकूल होते ही प्रॉपर्टी खरीदारों ने एकजुट होकर रियल एस्टेट कंपनियों और डेवलपर्स पर कीमतें कम करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। खरीदारों ने मिल-जुलकर सौदेबाजी के सहारे दिल्ली में भी डीएलएफ द्वारा कीमतें गिरवाने की मुहिम छेड़ रखी है। इन खरीदारों को डीएलएफ की ओर से 15 मार्च तक दाम घटाने का आश्वासन मिल चुका है। प्रॉपर्टी बाजार में जहां अक्सर डेवलपर्स गठजोड़ कर कीमतों को नियंत्रित करते हैं, खरीदारों की यह एकजुटता बाजार को प्रभावित करने वाली घटना साबित हो सकती है। ऐसे दबाव के चलते डीएलएफ चेन्नई और बंगलूरू में 20 से 30 फीसदी तक कीमतें कम कर चुकी है। इस मुहिम में शामिल चार्टर्ड एकाउंटेंट सचिन जैन ने त्नबिजनेस भास्करत्न को बताया कि पिछले साल फरवरी में लांच हुए डीएलएफ के न्यू टाउन हाइट्स प्रोजेक्ट में उन्होंने 50 लाख रुपये में 2250 रुपये प्रति वर्ग फुट के भाव पर 1760 वर्ग फुट एरिया वाले 3 बेडरूम फ्लैट का सौदा किया था। गत दिसंबर तक डीएलएफ को उन्होंने करीब 40 फीसदी राशि का भुगतान भी कर दिया। हालांकि साइट पर निर्माण शुरू ही नहीं हुआ, जबकि उनसे नियमित अंतराल के बाद किस्तों की मांग की जाती रही। डेवलपर के इस रवैये के खिलाफ उन्होंने बाकी खरीदारों से बातचीत शुरू की और धीरे-धीरे करीब 322 लोग कंपनी के खिलाफ लामबंद हो गए। जैन के मुताबिक, खरीदारों ने बाजार की बदली स्थितियों के हिसाब से कीमतें 25 फीसदी तक कम करवाने, प्राइम लोकेशन चार्ज घटवाने और समयबद्ध भुगतान के बजाय निर्माण पूरा होने के हिसाब से भुगतान व्यवस्था के लिए मुहिम छेड़ने का फैसला किया। इसके संचालन के लिए कोर ग्रुप बनाया गया जिसमें चार्टर्ड एकाउंटेंट, एडवोकेट आदि शामिल हैं। खरीदारों का यह ग्रुप डीएलएफ के टॉप मैनेजमेंट से बातचीत कर चुका है और जैन के मुताबिक, करीब दो सप्ताह पहले डीएलएफ ने उन्हें 15 मार्च तक कीमतें कम करने जैसी राहत देने का आश्वासन दिया है। हालांकि, डीएलएफ के प्रवक्ता ने दिल्ली-एनसीआर में खरीदारों के दबाव में कीमतें गिराने से इनकार किया है। प्रवक्ता का कहना है कि कंपनी ने चेन्नई में कीमतें घटाई हैं, क्योंकि वहां प्रोजेक्ट काफी पहले लांच किए गए थे और कीमतें ज्यादा थीं। लेकिन यह बात हर प्रोजेक्ट पर लागू नहीं हो सकती। गुड़गांव में न्यू टाउन हाइट्स प्रोजेक्ट की कीमतें पहले ही काफी कम हैं। वैसे, प्रवक्ता ने यह जरूर माना कि खरीदार देखा-देखी कीमतें कम करवाने के प्रयास में हैं।