24.5.09
मुनाफे पर नजर रख नई रणनीति बनाने में जुटे डेवलपर्स
बदले आर्थिक माहौल में रियल एस्टेट कंपनियां अपने प्रोजेक्ट को लेकर नए सिरे से रणनीति तय करने में जुट गई हैं। व्यावसायिक इस्तेमाल वाली इमारतों की मांग में कमी, अपेक्षाकृत सस्ते मकानों की मांग और फंड की किल्लत के चलते रियल एस्टेट कंपनियों को अपनी रणनीति में बदलाव करने पड़ रहे हैं। इसके चलते डेवलपर्स की ओर से लैंडयूज (भू-उपयोग) में बदलाव की कोशिशों में भी तेजी दिखी है।
जमीन के प्रस्तावित इस्तेमाल को बदलने के सिलसिले में सेज परियोजनाएं मुख्य हैं। देश की प्रमुख रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ लिमिटेड आईटी और बीपीओ कंपनियों के दफ्तर की मांग में कमी को वजह बताते हुए चार आईटी सेज की मंजूरी वापस लेने की मांग कर चुकी है। उधर, नई दिल्ली में डीएलएफ के आईटी सेज की जगह भी हाउसिंग प्रोजेक्ट आ सकता है।
नोएडा में 5000 करोड़ रुपये में भूखंड खरीद कर धूम मचाने वाले बीपीटीपी डेवलपर्स ने भी माहौल को देखते हुए प्लॉट का बड़ा हिस्सा वापस करने का फैसला किया है। बाकी बचे छोटे हिस्से पर अब होटल बनाने की योजना है।
नोएडा अथॉरिटी ने भी बदले माहौल में डेवलपर्स को लैंडयूज बदलने और सौदा वापस करने के मामलों में कई तरह की छूट दी है। लैंडयूज और योजनाओं में बदलाव के अलावा फंड जुटाने के लिए भी डेवलपर्स की कोशिशें लैंड बैंक पर आ टिकी हैं। डीएलएफ नॉन-स्ट्रेटेजिक प्रोजेक्ट और जमीन से बाहर होने की घोषणा कर चुकी है।
देश भर में बड़े पैमाने पर होटल प्रोजेक्ट डेवलपर्स की बदली रणनीति से प्रभावित हुए हैं। अगले सात वर्षे में देश भर में करीब 100 होटल खोलने जा रही पाश्र्वनाथ डेवलपर्स ने इन प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का काम रोक दिया है।
रिटेल प्रॉपर्टी के बजाय सस्ते मकानों की बढ़ती मांग की वजह से भी कई डेवलपर्स लैंडयूज में बदलाव करने में जुट गए हैं। मेरठ के प्रमुख गाडविन ग्रुप के एमडी जितेंद्र सिंह बाजवा का कहना है कि हाल ही में कई मॉल्स की बुरी दशा देखकर उन्होंने मॉल बनाने का इरादा छोड़कर मध्य वर्ग के लिए मकान बनाने पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।
निर्माण परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देने वाली दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमेटी से मिली जानकारी के मुताबिक डीएलएफ समेत कई नामी डेवलपर्स ने कमर्शियल अथवा रेजीडेंशियल प्रोजेक्ट के लिए मंजूरी मांगी है।
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