4.5.09

बटर ऑयल के आयात से डेयरी उद्योग के सामने नई मुश्किलें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बटर ऑयल की कीमतों में गिरावट के चलते भारतीय डेयरी उद्योग व दुग्ध उत्पादकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से बटर ऑयल के आयात का फैसला किया गया है। भारतीय बाजार में जहां घी की कीमतें 180 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास हैं, वहीं विदेश से आयात होने वाले सस्ते बटर ऑयल से बना घी 120-130 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव बेचा जा सकता है। हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय ने दो कंपनियों को 4,000 टन बटर ऑयल के आयात का लाइसेंस दिया है। वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक नोवा ब्रांड घी बेचने वाली स्र्ट्िलग एग्रो इंडस्ट्रीज और करन ब्रांड घी की मालिक करनाल मिल्क फूड्स को 4,000 टन बटर ऑयल के आयात का लाइसेंस मिला है। इसके लिए कृषि मंत्रालय के डेयरी एवं पशुपालन विभाग की सहमति भी मिल गई है। फिलहाल ग्लोबल बाजार में बटर ऑयल का भाव 1500 से 1600 डॉलर प्रति टन यानी 75-80 रुपये प्रति किलो है। इस पर 35.2 फीसदी आयात शुल्क चुकाने के बाद भी आयातित बटर ऑयल से घी बनाकर उसे 120-130 रुपये प्रति किलो के भाव बेचा जा सकता है। यही भारतीय डेयरी उद्योग के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। घरेलू बाजार में घी की कीमत फिलहाल 180 रुपये प्रति किलोग्राम है। ऐसे में घरेलू दुग्ध उत्पादक कीमतों के मामले में विदेश से आए बटर ऑयल का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं। यही स्थिति एसएमपी के मामले में भी है। एसएमपी (स्किम्ड मिल्क पाउडर) का घरेलू बाजार में भाव करीब 90 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका भाव 1600 डॉलर प्रति टन (करीब 80 रुपये प्रति किलो) है। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) को 10,000 टन तक एसएमपी के शुल्क मुक्त आयात की मंजूरी मिली है। एनडीडीबी अगर एसएमपी का आयात करने का फैसला करता है तो भी घरेलू उद्योग को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। यूरोपीय संघ की ओर से बटर ऑयल का आधिकारिक न्यूनतम मूल्य 2200-2300 डॉलर प्रति टन तय किया गया है, लेकिन निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए वहां जनवरी से सब्सिडी दी जाने लगी है। डेयरी उद्योग के सामने नई मुश्किलें इसके चलते यूरोपीय निर्यातक 1500-1600 डॉलर प्रति टन के भाव पर बटर ऑयल का निर्यात करने में सक्षम हैं। यूरोपीय संघ की ओर से एसएमपी पर अधिकतम 265 डॉलर प्रति टन और बटर ऑयल पर 750 डॉलर प्रति टन की सब्सिडी दी जा रही है। इसके विपरीत भारत सरकार ने पिछले साल अप्रैल में 10 हजार टन तक एसएमपी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 15 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी और बटर ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 40 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी कर दिया था। ग्लोबल बाजार में पिछले दो वर्षे के दौरान बटर ऑयल और एसएमपी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। वर्ष 2007-08 के सितंबर माह में बटर ऑयल के मूल्य 5000-6000 डॉलर प्रति टन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए थे, जो अब गिरकर 1500-1600 डॉलर प्रति टन के स्तर पर आ गए हैं। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से भी 1650-1700 डॉलर प्रति टन की दर से बटर ऑयल का निर्यात किया जा रहा है। मालूम हो कि यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड विश्व के कुल डेयरी निर्यात में तकरीबन 80 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं।

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