11.2.09
राष्ट्रमंडल खेल में पर्यटकों के लिए कमरों के इंतजाम में रोड़े
अजीत सिंह
होटल बनाने के लिए नीलाम 33 में से 6 साइट पर निर्माण शुरू न हो पाने की वजह से राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियां प्रभावित हो सकती है। डीडीए ने इन होटलों के जरिये खेलों के दौरान करीब 6000 कमरे मुहैया कराने की योजना बनाई थी। निर्धारित समय तक होटल न बनाने वाले डेवलपर्स के खिलाफ डीडीए जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई कर सकता है। राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान दिल्ली व एनसीआर में करीब 40 हजार होटल रूम की जरूरत समझी जा रही है, जबकि फिलहाल छोटे-बड़े सभी तरह के होटल मिलाकर 15 हजार से ज्यादा कमरे नहीं हैं।
डीडीए सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक,अभी तक होटलों का निर्माण शुरू न करने वाले इन आवंटियों के खिलाफ ज्यादा कार्रवाई के विकल्प नहीं हैं। डीडीए के आवंटन नियमों के अनुसार, नियम समय सीमा तक प्रोजेक्ट पूरा न करने वाले डेवलपर्स की 5 फीसदी बैंक गारंटी जब्त की जा सकती है। लेकिन यहां बड़ा सवाल डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई या जुर्माने का नहीं है। दरअसल वर्ष 2010 तक इन होटलों के तैयार न होने से राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान आवास व्यवस्था की योजना बिगड़ सकती है। डीडीए इन 33 होटलों का निर्माण कराकर करीब 6000 होटल के कमरों की व्यवस्था कराने की तैयारी में था। इन तैयारियों को बड़ा झटका तब लग जब मालूम हुआ कि 6 होटल साइट पर निर्माण शुरू होना तो दूर अभी इसके लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की मंजूरी भी नहीं ली गई है। डीडीए ने इस बारे में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को भी सूचित किया है।
बदली आर्थिक स्थितियों में रियल एस्टेट डेवलपर्स के प्रोजेक्ट अटक गए हैं। केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक, मेट्रो शहरों में सिर्फ 60 फीसदी होटलों का निर्माण ही समय सीमा के मुताबिक चल रहा है। जानकारों का मानना है कि होटल निर्माण में तकरीबन तीन साल का समय लग जाता है और जैसी ऊंची बोली पर डीडीए ने होटल प्लॉट नीलाम किए हैं उनका लागत खर्च निकालने की समय अवधि 20 साल तक हो सकती है।
राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान होटल निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए फ्लोर स्पेस इंडेक्स यानी एफएसआई नियमों में छूट भी डेवलपर्स को लुभाने में कामयाब नहीं हो पाई है।
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