आईसीएआई के अध्यक्ष उत्तम प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि रिजर्व बैंक ने जीटीबी मामले में प्राइसवाटरहाउस के खिलाफ आईसीएआई में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके तहत बैंक के एनपीए (फंसे कर्ज) में हेराफेरी करने जैसे आरोप थे जिसके बाद आईसीएआई ने जीटीबी के खातों की ऑडिटिंग में प्राइसवॉटरहाउस की भूमिका की जांच शुरू की थी। इस जांच के लिए एक अनुशासन समिति का गठन किया गया था जिसने अब अपनी रिपोर्ट दी है। अग्रवाल के मुताबिक इस रिपोर्ट में प्राइसवाटरहाउस के दो ऑडिटरों को दोषी पाया गया है। दोषी पाए गए इन ऑडिटर्स के खिलाफ कार्रवाई का फैसला आईसीएआई काउंसिल की आगामी बैठक में किया जाएगा। इसके बाद ही दोषी ऑडिटरों के खिलाफ कार्रवाई तय होगी। गौरतलब है कि प्राइसवाटरहाउस वर्ष 2002-03 में जीटीबी की ऑडिटर थी। इसके अगले साल ही भारतीय रिजर्व बैंक ने खातों में हेराफेरी और घोटाले के आरोपों के चलते बैंक के कारोबार पर रोक लगा दी थी। वर्ष 2004 में भारतीय रिजर्व बैंक ने आईसीएआई को जीटीबी मामले में ऑडिटर्स की भूमिका की जांच करने को कहा था।
इस मामले में पिछले पांच-छह साल से चल रहे जांच और समितियां बनाने के सिलसिले का अभी तक कोई निर्णायक परिणाम नहीं निकल पाया है। जीटीबी घोटाले में संयुक्त संसदीय समिति को भी जांच के आदेश दिए गए थे। आईसीएआई के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आईसीएआई काउसिंल इस मामले में प्रथम दृष्टया प्राइसवाटरहाउस के ऑडिटर्स को अपनी जिम्मेदारी में लापरवाही बरतने का दोषी मान चुकी है। इस दौरान आईसीएआई की ओर से दिसंबरत्न06 में प्राइसवाटरहाउस को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने जैसी कार्रवाई ही की गई। अगस्त 2007 में आईसीएआई की अनुशासन समिति को इसे भेज दिया गया था।
11.2.09
जीटीबी मामले में प्राइसवाटरहाउस के दो ऑडिटर दोषी
अजीत सिंह / ममता सिंह
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की अनुशासन समिति ने भारी अनियमितताओं के कारण डूब चुके ग्लोबल ट्रस्ट बैंक की ऑडिटर प्राइसवाटरहाउस के तीन में से दो ऑडिटर्स को दोषी करार दिया है। आईसीएआई की अनुशासन समिति ने सोमवार को इस मामले की जांच रिपोर्ट अध्यक्ष को सौंप दी। रिपोर्ट में दोषी पाए ऑडिटर्स के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए, इस बारे में निर्णय लिया जाना अभी बाकी है। वैसे तो यह मामला वर्ष 2004 से ही आईसीएआई के पास है, लेकिन सत्यम मामले में भी प्राइसवाटरहाउस की भूमिका पर संदेह होने के बाद ग्लोबल ट्रस्ट बैंक मामले की जांच भी सुर्खियों में आ गई थी। यही नहीं, ग्लोबल ट्रस्ट बैंक (जीटीबी) के ऑडिटरों के खिलाफ कार्रवाई में देरी को लेकर आईसीएआई भी सवालों के घेरे में है। उधर, सत्यम मामले में भी प्राइसवाटरहाउस के दो ऑडिटर हिरासत में हैं।
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